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केस 7: श्योर-शॉट टिप · भाग 2 / 2

पैसा कहाँ है?

ये कहानियाँ असली घटनाओं से प्रेरित हैं, लेकिन काल्पनिक हैं। किरदार, परिवार, गाँव, बैंक, ऐप और कंपनी के नाम काल्पनिक हैं; किसी असली व्यक्ति या संस्था से समानता संयोग है। RBI, SEBI, पुलिस और 1930 जैसी असली संस्थाओं का ज़िक्र सिर्फ़ जानकारी के लिए है — AQVIK उनसे जुड़ा नहीं है। ये क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है, और शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। कोई ग़लती दिखे तो support@aqvik.com पर बताएँ।

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इनकार

राजीव जी रात भर बैठकर तान्या को मैसेज करते रहे।

"थोड़ा चार्ज कम कर दो।" "सर, रेगुलेशंस।" "मैं ₹10 लाख दे सकता हूँ।" "सर, पूरा ₹46.28 लाख। वरना अकाउंट 7 दिन में डॉर्मेंट हो जाएगा और पूरा पोर्टफ़ोलियो ज़ब्त।" "प्रोफ़ेसर साहब से बात कराओ।" "सर अभी सिंगापुर में कॉन्फ़्रेंस में हैं।"

सुबह 4 बजे राजीव जी ने इरा के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। इरा जाग ही रही थी।

"बेटा… शायद हम ज़्यादा सोच रहे हैं। शायद SEBI की वेबसाइट में नंबर अपडेट नहीं हुआ। शायद—"

"पापा।" इरा ने लैपटॉप घुमाया। तीन टैब खुले थे। SEBI की वेबसाइट: No records found। CDSL स्टेटमेंट: सिर्फ़ ₹40,000 के शेयर। एक्सचेंज की IPO लिस्ट: कोई जलधारा नहीं।

"आपका पैसा उस ऐप में नहीं है, पापा। कभी था ही नहीं। वो ऐप एक TV है जिसमें एक आदमी आपको अपनी मर्ज़ी की पिक्चर दिखा रहा था।"

राजीव जी कुर्सी पर बैठ गए। 26 साल का "सेफ़ आदमी"। 54 साल की उम्र। और एक स्क्रीन पर ₹2.31 करोड़ जो कभी थे ही नहीं।

"₹47 लाख, इरा," उन्होंने फुसफुसाया। "घर का लोन भी।"

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Digital Thug Life · Season 1 · Written by AQVIK · Illustrations are AI-generated.