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केस 2: OTP का खेल · भाग 1 / 2

रिवॉर्ड पॉइंट

ये कहानियाँ असली घटनाओं से प्रेरित हैं, लेकिन काल्पनिक हैं। किरदार, परिवार, गाँव, बैंक, ऐप और कंपनी के नाम काल्पनिक हैं; किसी असली व्यक्ति या संस्था से समानता संयोग है। RBI, SEBI, पुलिस और 1930 जैसी असली संस्थाओं का ज़िक्र सिर्फ़ जानकारी के लिए है — AQVIK उनसे जुड़ा नहीं है। ये क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है, और शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। कोई ग़लती दिखे तो support@aqvik.com पर बताएँ।

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शुरुआत

इंदौर। एबी रोड का सिग्नल। शुक्रवार, शाम 6:47।

बाइक के हैंडल पर एक हाथ, कान और हेलमेट के बीच फँसा फोन, और दूसरे हाथ में दवाइयों के सैंपल का बैग। इमरान क़ुरैशी की ज़िंदगी आजकल ऐसी ही थी।

फोन पर एक लड़की की मीठी आवाज़ थी: "सर, बस एक आख़िरी OTP। ये वाला सिर्फ़ कैंसिलेशन के लिए है। उसके बाद आपके सारे रिवॉर्ड पॉइंट आपके खाते में, और ग़लती से जो चार्ज लगा था वो भी वापस।"

सिग्नल लाल था। इमरान ने फोन देखा। SMS आया था। छह अंक। उसने पढ़ा नहीं — बस नंबर देखा।

"हाँ… 4-8-2-9-1-6।"

"थैंक यू, सर! आपका प्रोसेस पूरा हो गया। आपका दिन शुभ हो।"

सिग्नल हरा हुआ। पीछे से हॉर्न बजाए जा रहे थे।

इमरान मुस्कुराया। उसे लगा उसने आज ₹18,450 कमाए हैं।

असल में, पिछले 11 मिनट में उसने ₹2,94,000 गँवाए थे।

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Digital Thug Life · Season 1 · Written by AQVIK · Illustrations are AI-generated.