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केस 2: OTP का खेल · भाग 2 / 2

ग़लती किसकी?

ये कहानियाँ असली घटनाओं से प्रेरित हैं, लेकिन काल्पनिक हैं। किरदार, परिवार, गाँव, बैंक, ऐप और कंपनी के नाम काल्पनिक हैं; किसी असली व्यक्ति या संस्था से समानता संयोग है। RBI, SEBI, पुलिस और 1930 जैसी असली संस्थाओं का ज़िक्र सिर्फ़ जानकारी के लिए है — AQVIK उनसे जुड़ा नहीं है। ये क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है, और शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। कोई ग़लती दिखे तो support@aqvik.com पर बताएँ।

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कार्ड के पीछे वाला नंबर

रात 11:09।

"अवध नेशनल बैंक में आपका स्वागत है। क्रेडिट कार्ड से जुड़े फ़्रॉड की रिपोर्ट के लिए, 1 दबाइए।"

दीपक ने 1 दबाया। फिर 3। फिर अपना कार्ड नंबर। इमरान सोफ़े पर बैठा था, जैसे किसी ने उसमें से हवा निकाल दी हो।

एक इंसान की आवाज़ आई। थकी हुई, लेकिन साफ़।

"अवध नेशनल बैंक, फ़्रॉड मॉनिटरिंग टीम, मैं अर्जुन मेहरा बोल रहा हूँ। बताइए।"

दीपक ने एक साँस में सब बताया — रिवॉर्ड पॉइंट, तीन OTP, तीन बार ₹98,000, GoldKart Online।

अर्जुन ने बीच में एक भी सवाल नहीं किया। टाइपिंग की आवाज़ आती रही।

"ठीक है। सबसे पहले — कार्ड अभी ब्लॉक कर रहा हूँ। हो गया। रात 11:14। इसके बाद इस कार्ड पर जो भी होगा, उसकी ज़िम्मेदारी बैंक की। तीनों ट्रांज़ैक्शन पर डिस्प्यूट डाल दिया है। शिकायत नंबर SMS पर आएगा।"

"पैसा वापस आएगा?" इमरान ने पहली बार कुछ बोला।

अर्जुन एक सेकंड रुका। "मैं आपसे सच बोलूँगा, इमरान जी, क्योंकि ठग आपसे झूठ बोल चुके हैं। अभी दो काम और कीजिए। एक — 1930 पर कॉल कीजिए, अभी, इसी वक़्त। दो — कल सुबह cybercrime.gov.in पर शिकायत। बाक़ी बात जाँच के बाद।"

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Digital Thug Life · Season 1 · Written by AQVIK · Illustrations are AI-generated.