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केस 5: ATM के बाहर · भाग 2 / 2

कार्ड किसका है?

ये कहानियाँ असली घटनाओं से प्रेरित हैं, लेकिन काल्पनिक हैं। किरदार, परिवार, गाँव, बैंक, ऐप और कंपनी के नाम काल्पनिक हैं; किसी असली व्यक्ति या संस्था से समानता संयोग है। RBI, SEBI, पुलिस और 1930 जैसी असली संस्थाओं का ज़िक्र सिर्फ़ जानकारी के लिए है — AQVIK उनसे जुड़ा नहीं है। ये क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है, और शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। कोई ग़लती दिखे तो support@aqvik.com पर बताएँ।

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1930, सुबह 10:55

Calling…

1930

नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन

"नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन।"

कबीर ने सब बताया। गुरुवार 11:40, मानसरोवर का ATM। आठ निकासी। एक ज्वेलरी दुकान। ₹1,42,500।

"आख़िरी ट्रांज़ैक्शन कब हुआ?"

"रात 12:07।"

दूसरी तरफ़ एक पल की चुप्पी। "दस घंटे से ज़्यादा हो गए। ATM से निकला कैश वापस लाना मुश्किल होता है, बेटा। लेकिन दुकान वाला ट्रांज़ैक्शन — ₹62,500 — उसका रिकॉर्ड है, दुकान का पता है, CCTV होगा। वो ज़रूरी है। आपका एकनॉलेजमेंट नंबर SMS पर आ रहा है। आज ही नज़दीकी थाने में भी जाइए, और cybercrime.gov.in पर पूरी शिकायत डालिए। ग़लत वाला कार्ड सँभालकर रखना।"

कबीर ने शबनम बानो का कार्ड एक लिफ़ाफ़े में रखा। जैसे किसी फ़िल्म में सबूत रखते हैं।

लेकिन ये फ़िल्म नहीं थी। ये दादी की पेंशन थी।

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Digital Thug Life · Season 1 · Written by AQVIK · Illustrations are AI-generated.