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केस 6: लाइक करो, कमाओ · भाग 2 / 2

पापा को कैसे बताऊँ?

ये कहानियाँ असली घटनाओं से प्रेरित हैं, लेकिन काल्पनिक हैं। किरदार, परिवार, गाँव, बैंक, ऐप और कंपनी के नाम काल्पनिक हैं; किसी असली व्यक्ति या संस्था से समानता संयोग है। RBI, SEBI, पुलिस और 1930 जैसी असली संस्थाओं का ज़िक्र सिर्फ़ जानकारी के लिए है — AQVIK उनसे जुड़ा नहीं है। ये क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है, और शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। कोई ग़लती दिखे तो support@aqvik.com पर बताएँ।

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सुबह 6:20

पूजा रात भर नहीं सोई।

सुबह 6:20 बजे छोटा भाई साहिल — 19 साल, पॉलिटेक्निक में — पानी पीने उठा तो दीदी को हॉल में बैठा देखा। आँखें सूजी हुईं। हाथ में डायरी।

"दीदी? तू सोई नहीं?"

पूजा ने कुछ कहना चाहा। आवाज़ नहीं निकली। बस लैपटॉप उसकी तरफ़ घुमा दिया। डैशबोर्ड। चैट। पेमेंट के स्क्रीनशॉट। एक के बाद एक।

साहिल पढ़ता गया। उसका चेहरा बदलता गया।

"दीदी… ये पापा के…"

"हाँ।"

साहिल एक पल चुप रहा। फिर वो किया जो पूजा ने 11 दिन में एक बार भी नहीं किया था — उसने किसी और को बताया।

"फोन दे। 1930। हमारे कॉलेज में साइबर वाले आए थे। बोले थे — जितनी जल्दी, उतना अच्छा।"

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Digital Thug Life · Season 1 · Written by AQVIK · Illustrations are AI-generated.