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केस 9: पापा, मैं मुसीबत में हूँ · भाग 2 / 2

असली आवाज़

ये कहानियाँ असली घटनाओं से प्रेरित हैं, लेकिन काल्पनिक हैं। किरदार, परिवार, गाँव, बैंक, ऐप और कंपनी के नाम काल्पनिक हैं; किसी असली व्यक्ति या संस्था से समानता संयोग है। RBI, SEBI, पुलिस और 1930 जैसी असली संस्थाओं का ज़िक्र सिर्फ़ जानकारी के लिए है — AQVIK उनसे जुड़ा नहीं है। ये क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है, और शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। कोई ग़लती दिखे तो support@aqvik.com पर बताएँ।

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वीडियो कॉल

"वीडियो कॉल कर। अभी," दिनेश जी ने बस इतना कहा।

दो सेकंड बाद स्क्रीन पर आर्यन का चेहरा आया। थिएटर के बाहर की पीली रोशनी। पीछे तीन दोस्त। हाथ में पॉपकॉर्न का ख़ाली डिब्बा।

"पापा? आप रो क्यों रहे हो? मम्मी?"

शोभा जी ने फोन छीना और स्क्रीन को चूम लिया। बस चूमती रहीं। कुछ बोल नहीं पाईं।

तन्वी ने सब बताया। कॉल। एक्सीडेंट। इंस्पेक्टर। ₹2,70,000। ब्रूनो।

आर्यन का चेहरा धीरे-धीरे सफ़ेद पड़ता गया। "मेरी आवाज़ में? मैं रो रहा था?"

"तू रो रहा था," तन्वी ने कहा। "बिल्कुल तेरे जैसा। बस ब्रूनो का नाम सुनकर तू नहीं हँसा।"

आर्यन के दोस्त पीछे चुप हो गए थे। एक ने धीरे से कहा, "भाई… तेरी रील्स।"

आर्यन ने अपने फोन की तरफ़ देखा। 140 वीडियो। 4 घंटे की आवाज़। और आज की स्टोरी: "Phone OFF। डिस्टर्ब मत करना 😎"

"पापा," उसने फुसफुसाया। "मैंने ख़ुद उन्हें बताया कि कब कॉल करना है।"

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Digital Thug Life · Season 1 · Written by AQVIK · Illustrations are AI-generated.